Kashmir को India से छीनने की थी साजिश, Russia के दांव ने पलट दी बाजी| PM Modi |Putin |America

Kashmir को India से छीनने की थी साजिश, Russia के दांव ने पलट दी बाजी| PM Modi |Putin |America

Kashmir को India से छीनने की थी साजिश

22 जून 1962 ये वो तारीख है जब भारत से कश्मीर को छीनने की पूरी साजिश अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों के द्वारा रची गई थी। लेकिन रूस दुनिया के सामने भारत के लिए एक ऐसा ढाल बनकर खड़ा हो गया जिसे कोई भेद ना सका और कश्मीर भारत के हाथों से जाने से बच गया आज हम आपको इसी कहानी के फ्लैशबैक में लेकर चलेंगे और भारत रूस की उस जबरदस्त दोस्ती की दास्तान भी सुनाएंगे जिसका मिशाल आज पूरी दुनिया में दी जाती है।

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के दौरान भारत रूस की दोस्ती की चर्चा भी जोरों पर है ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका समेत सभी पश्चिमी देशों से प्रतिबंधों की मार झेल रहा रूस आज भारत की तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहा है मुश्किल घड़ी में भारत की तरफ देखना जायज भी है क्योंकि आजादी के बाद अगर रूस ने भारत का साथ नहीं दिया होता तो शायद अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के भारत के कई टुकड़े करने की साजिश कामयाब हो जाती।

13 अप्रैल 1947 को पहली बार रूस और भारत के आधिकारिक तौर पर दिल्ली और मॉस्को में मिशन स्थापित करने का फैसला लिया गया था यानि दोनों देशों के बीच दोस्ती के उस सिलसिले को शुरू करने का फैसला लिया गया था जो आज भी उसी ताजगी के साथ चला रहा है। 22 जून 1962 को आयरलैंड ने कश्मीर मसले को लेकर भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था जिसका अमेरिका फ्रांस ब्रिटेन चीन के अलावा आयरलैंड और वेनेजुएला ने समर्थन किया।

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हालांकि रूस ने अपने 100वें वीटो का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे पर भारत के समर्थन में किया जिसकी वजह से कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ एक बड़ी साजिश नाकाम हो गई थी। माना जाता है कि सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव के पीछे भारत के खिलाफ पश्चिमी देशों की बड़ी साजिश थी इसका मकसद कश्मीर को भारत से छीनकर पाकिस्तान को दे देना था।

इससे पहले भी 1961 में रूस ने 99 में भी 2 का इस्तेमाल भारत के लिए किया था इस बार रूस का बीच ऑफ गोवा मसले पर भारत के पक्ष में था इसके अलावा पहले भी रूस पाकिस्तान के खिलाफ और भारत के पक्ष में अपने वीटो का इस्तेमाल कई बार कर चुका है। इतना ही नहीं भारत के परमाणु कार्यक्रमों को सफल बनाने में भी वैश्विक मंच पर रूस ने भारत का कई बार समर्थन किया।

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भले ही कुछ सालों में अमेरिका और भारत के बीच नजदीकियां बढ़ी हो लेकिन हकीकत यही है कि भारत का सच्चा दोस्त रूस ही है। पिछले 70 सालों में अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य बदल गए कई देश में गृह युद्ध की आग में झुलस गए और कई देशों के बीच रिश्तो में गिरावट आई लेकिन भारत और रूस के रिश्तो में आज तक कोई खटास देखने को नहीं मिली भारत की हर मुश्किल में रूस हमेशा ही खड़ा रहा है हालांकि भारत भीड़ उसकी हर मुश्किल घड़ी में उसका साथ देता रहा है।

बीते हफ्ते दूसरी सेनाओं के द्वारा यूक्रेन की राजधानी कीव के पास आम लोगों की हत्या करने के आरोप के चलते अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पेश किया था इस प्रस्ताव को लेकर भारत ने फिर उससे अपनी दोस्ती निभाई और इस वोटिंग प्रक्रिया में शामिल होने से इंकार कर दिया ऐसे में दोनों देशों के बीच दोस्ती की मिसाल दी भी क्यों ना जाए बहरहाल इस खबर को लेकर आपकी क्या राय है हमें कमेंट सेक्शन में कमेंट करके जरूर बताइए।

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