हिन्दू महाकाव्यों के अनुसार 8 सबसे सुंदर स्त्री

हमारे धर्म ग्रंथों में बहुत बार सुंदर देवियों अप्सराओं दिव्य स्त्रियों का वर्णन मिलता है आज हम हमारे प्राचीन इतिहास को खंगाल कर आप सबके लिए जो पोस्ट लाए हैं उसमें हम जानेंगे कौन थी 8 सबसे सुंदर स्त्री (Top 8 Most Beautiful Women In Hindu epics) हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार।

हिन्दू महाकाव्यों के अनुसार 8 सबसे सुंदर स्त्री

अहिल्या

अहिल्या ब्रह्मा जी की पुत्री थी उन्हें वरदान प्राप्त था कि वे सदा 16 साल की बनी रहेंगी वह बहुत सुंदर थी सब ऋषि देव और असुर उनसे विवाह करना चाहते थे देवराज इंद्र अहिल्या को प्राप्त करना चाहते थे जब अहिल्या का विवाह गौतम ऋषि के साथ हो गया था तब भी इंद्र पीछे नहीं हटे।

और एक दिन गौतम ऋषि का रूप बनाकर उन्होंने ऋषि पत्नी का सतीत्व भंग कर दिया तब ऋषि गौतम ने देवराज इंद्र और अपनी पत्नी को श्राप दे दिया और अहल्या पाषाण बन गई जब भगवान विष्णु श्री राम रूप में वहां पधारें तब अहिल्या का उद्धार हुआ।

दमयंती

विदर्भ देश की राजकुमारी दमयंती अत्यंत सुंदर थी उनकी सुंदरता का प्रमाण इसी बात से मिल जाता है कि इंद्र यम अग्नि और वरुण जैसे देवता भी उसके स्वयंवर में भाग लेने आए थे वे सभी उससे विवाह करने की इच्छा रखते थे।

परंतु उसे निषाद राज के राजकुमार नल से प्रेम हो गया था नल और दमयंती की कथा का वर्णन हमें महाभारत के 1 परम में मिलता है।

सत्यभामा

सत्यभामा श्री कृष्ण की प्रिय पत्नी थी और अत्यंत सुंदर और एक योद्धा भी थी जब श्री कृष्ण पांडवो से मिलने जाते हैं तो वे सत्यभामा को ही साथ ले जाते हैं द्रौपदी सत्यभामा को अनुपम सुंदर बुलाती है मां सत्यभामा भू देवी का अवतार थी और उनका जन्म नरकासुर के संहार लिए ही हुआ था।

उर्वशी

हिन्दू महाकाव्यों के अनुसार 8 सबसे सुंदर स्त्री

एक समय की बात है ऋषि नर नारायण हिमालय में स्थित बद्रीनाथ में तपस्या कर रहे थे उनकी तपस्या ने इंद्र तथा अन्य देवताओं को चिंतित कर दिया इसीलिए इंद्र ने कामदेव वसंद और अप्सराओं को नर नारायण की तपस्या भंग करने के लिए भेजा।

ऋषि नारायण उनके इस कार्य से क्रोधित हो गए और उन्होंने अपनी जांघ पर हाथ मारा और उसी समय वहां से एक सुंदर अप्सरा निकली जिसका आकर्षण आकाशीय अप्सराओं से कहीं अधिक श्रेष्ठ था।

यह देख देवराज इंद्र ने लजित और क्षोभ से भर कर नारायण से क्षमा मांगी नारायण जी ने इंद्र क्षमा करते हुए आशीर्वाद स्वरुप उस अप्सरा को इंद्र के साथ ही भेज दिया ऋषि की जांग अर्थात उर्व से उत्पन्न होने के कारण उन्हें उर्वशी कहा गया।

उर्वशी देवराज इंद्र की सभा में आपकी सभी अफसरों से कहीं अधिक सुंदर थी इसीलिए सभी उर्वशी से इर्ष्या करती थी।

रुकमणी

माता रुक्मणी मां लक्ष्मी का अवतार थी श्रीमद्भागवत में जब माँ रुकमणी मां अंबिका के मंदिर से बाहर आती हैं गहनों से सजी हुई उनकी अनुपम सुंदरता को देखकर राजा महाराजा जो उनके स्वयंवर के लिए एकत्रित हुए थे अपने होश खो बैठते हैं वे श्रीकृष्ण की पहली पत्नी थी और सबसे सुंदर भी थी।

द्रौपदी

महाभारत आदि पर्व अध्याय 166 के अनुसार जब द्रुपद ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया था तभी यज्ञ की वेदी में से एक कुमारी कन्या भी प्रकट हुई जो पांचाली कहलाई बड़ी सुंदरी एवं सौभाग्य शालिनी थी उसका एक-एक अंग देखने योग्य था।

उसके शरीर की कांति श्याम थी नेत्र ऐसे जान पड़ते थे कि मानव खिले हुए कमल के दल हो वे ऐसी जान पड़ती थी मानो साक्षात् देवी दुर्गा ही मानव शरीर धारण करके प्रकट हुई हूं उसके अंगों से नीलकमल किसी सुगंध प्रकट होकर एक कोस तक चारों ओर फैल रही थी।

उसने परम सुंदर रूप धारण कर रखा था उस समय पृथ्वी पर उसके जैसी सुंदर स्त्री दूसरी कोई नहीं थी देवता दानव भी उस देवबंद कन्या को पाने के लिए लालायत थे सुंदर कटी प्रदेश वाली उस कन्या के प्रकट होने पर आकाशवाणी हुई इस कन्या का नाम कृष्णा है यह समस्ततियों में श्रेष्ठ सुंदरी है और क्षत्रियों का संहार करने के लिए प्रकट हुई है।

यह सुमध्यमा समय पर देवताओं का कार्य सिद्ध करेगी स्वयंवर में जब द्रोपदी वहां आई तो वहां उपस्थित सभी लोग उसकी सुंदरता को देखकर दंग रह गए थे।

मोहिनी

समुद्र मंथन के उपरांत जब देव और सुर अमृत को लेने के अधिकार को लेकर आपस में झगड़ पड़े थे उस समय देत्यो ने धनवंतरी के हाथ से कमंडल छीन लिया था जिसमें अति उत्तम अमृत भरा हुआ था उस समय भगवान श्री विष्णु जी ने मोहिनी का रूप धारण किया था।

अतः मोहिनी ने वहां उपस्थित समस्त दायित्वों को अपनी सुंदरता से मोहित कर उनसे वह कमंडल लेकर देवताओं को दे दिया था।

माता सीता

मां सीता जिनका जन्म ही रावण के सहार के लिए हुआ था एक अद्वितीय सुंदरी थी बाल्मीकि रामायण के अरण्य कांड सर्ग 34 में सुपलखां मां सीता के सौंदर्य को बेजोड़ बताते हुए कहती हैं और राम की भार्या मां लक्ष्मी का साक्षात अवतार प्रतीत होती है।

उसके लंबे बाल हैं और नाक नक्श और शरीर की सुंदरता अनुपम है मैंने आज तक कोई देवी गंधर्व कन्या यक्षिणी या कोई और नारी इतनी रूपवान नहीं देखी वाल्मीकि रामायण केअरण्य कांड के सर्ग 46 के अनुसार जब रावण ने सीता को उनकी कुटिया में देखा तो उसने कहा कि देवी तुम सोने से चमकने वाली कमल के पुष्प के समान हो।

ऐसा जान पड़ता है कि तुम स्वयं देवी लक्ष्मी हो या कोई अप्सरा हो तुम्हारे शरीर की सुंदरता बेजोड़ है मैंने आज तक तुम्हारे जैसी अप्रतिम सुंदर इस धरती पर नहीं देखी है माता लक्ष्मी भागवत पुराण इस्कंद 8 के अनुसार समुद्र मंथन के समय उसमें से स्वयं भगवती लक्ष्मी देवी प्रकट हुई उनकी बिजली के समान चमकीला से दिशाएं जगमगा उठी।

निष्कर्ष

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